१.
जब आँख़ें खुली होती हैं
और दिखाई देते हैं कुछ मंज़र
जो मेरी दुनिया में तब के अलावा
और कभी कहीं भी दिखते नहीं हैं
बदन पर चादर ओढ़ी होती है
इस डर में कि कहीं वह गिर कर
इस बदन को ख़ूबसूरत न कर दे
जब आँख़ खुलती है
तब डर जाता हूँ यह देख कर
कि मंढ़राते हुए संकट जैसा
सूरज छाया हुआ है पूरे आसमान पर
और मैं दुआ कर रहा हूँ
कि मुझमें ऐसी ताकत आ जाये
कि मैं उसे श्राप दे सकूँ -
तोहे राहू लागे बैरी
यह डर तो रोज़ का है
रोज़ के साथ वह भी आ जाता है
२.
ऐसा कुछ भी तो नहीं है
और जो मेरे बग़ैर शुरू भी ना हो
घड़ी में झाँक कर देखता हूँ
तो पता चलता है कि समय क्या हुआ है
वरना ऐसा कोई भी तो नहीं
जो किसी ख़ास समय पर
मुझसे मिल ने आये
या मुझसे बात करे
मुझे कुछ काम दे
मुझसे कुछ माँगे
कुछ आवाज़ भी तो नहीं यहाँ
जो समय की सूचना दे मुझे
मैं उठता हूँ तो भूख़ लगती है मुझे
और सोता नहीं हूँ तब तक
जब भी सोचता हूँ
तब तब भूख़ लगती है मुझे
अब उसका भी कोई
ख़ास वक़्त नहीं है
यहाँ कुछ भी तो नहीं है
जो समय का पाबंद हो
बस दो चीज़ें हैं
जो समय के साथ
हर दम हर कदम चल रही हैं
एक उसकी रवानी
और दूसरी मेरी हैरानी
कोई ऐसा भी तो नहीं
जो बेवजह आए और
घड़ी भर के लिए
घड़ी को भुलाने की वजह बन जाए
मैं घड़ी में झाँक कर देखता हूँ
तो पता चलता है कि समय क्या हुआ है
वरना इस सन्नाटे में
बिन बताए
वक़्त तो सिर्फ़ जाता सुनाई देता है
जब आँख़ें खुली होती हैं
और दिखाई देते हैं कुछ मंज़र
जो मेरी दुनिया में तब के अलावा
और कभी कहीं भी दिखते नहीं हैं
तब मेरा ख़्याल है वक़्त का वह दौर होता है
जब चाँदनी से बचने के लिये मैंनेबदन पर चादर ओढ़ी होती है
इस डर में कि कहीं वह गिर कर
इस बदन को ख़ूबसूरत न कर दे
जब आँख़ खुलती है
तब डर जाता हूँ यह देख कर
कि मंढ़राते हुए संकट जैसा
सूरज छाया हुआ है पूरे आसमान पर
और मैं दुआ कर रहा हूँ
कि मुझमें ऐसी ताकत आ जाये
कि मैं उसे श्राप दे सकूँ -
तोहे राहू लागे बैरी
यह डर तो रोज़ का है
रोज़ के साथ वह भी आ जाता है
२.
ऐसा कुछ भी तो नहीं है
जो किसी ख़ास समय पर होता हो
जिस के लिए मेरा उधर होना ज़रूरी होऔर जो मेरे बग़ैर शुरू भी ना हो
घड़ी में झाँक कर देखता हूँ
तो पता चलता है कि समय क्या हुआ है
वरना ऐसा कोई भी तो नहीं
जो किसी ख़ास समय पर
मुझसे मिल ने आये
या मुझसे बात करे
मुझे कुछ काम दे
मुझसे कुछ माँगे
कुछ आवाज़ भी तो नहीं यहाँ
जो समय की सूचना दे मुझे
मैं उठता हूँ तो भूख़ लगती है मुझे
और सोता नहीं हूँ तब तक
जब भी सोचता हूँ
तब तब भूख़ लगती है मुझे
अब उसका भी कोई
ख़ास वक़्त नहीं है
यहाँ कुछ भी तो नहीं है
जो समय का पाबंद हो
बस दो चीज़ें हैं
जो समय के साथ
हर दम हर कदम चल रही हैं
एक उसकी रवानी
और दूसरी मेरी हैरानी
कोई ऐसा भी तो नहीं
जो बेवजह आए और
घड़ी भर के लिए
घड़ी को भुलाने की वजह बन जाए
मैं घड़ी में झाँक कर देखता हूँ
तो पता चलता है कि समय क्या हुआ है
वरना इस सन्नाटे में
बिन बताए
वक़्त तो सिर्फ़ जाता सुनाई देता है
कोई ऐसा भी तो नहीं
ReplyDeleteजो बेवजह आए और
घड़ी भर के लिए
घड़ी को भुलाने की वजह बन जाए
मैं घड़ी में झाँक कर देखता हूँ
तो पता चलता है कि समय क्या हुआ है
वरना इस सन्नाटे में
बिन बताए
वक़्त तो सिर्फ़ जाता सुनाई देता है
mast ekadam.
No comment.
ReplyDeleteHeavily influenced by Gulzar!
ReplyDeleteLiked the last part most
@क्षिप्रा, मेघना - आभार.
ReplyDelete@संवेद - होय. जाहीरपणे त्यांच्या दोन ओळी (तोहे राहू लागे बैरी, वक़्त जाता सुनाई देता है) सरळ उचलण्यासकट. आभार.
अजून किती वेळ लागणारेय?
ReplyDeleteपरक्या भाषेत कविता कशा करता येतात यार लोकांना? हम्म. परकी कुठेय वगैरे ठीकच.
ReplyDeleteपुन्हा वाचताना निराळी आवडली. तरी नो कमेण्टच.